तीज पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। खासतौर से साल में तीन बार तीज का त्योहार मनाया जाता है। हरियाली तीज, कजरी तीज और हरितालिका तीज। भादो महीने के कृष्णपक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली तीज को कजरी तीज के नाम से जाना जाता है। इस बार कजरी तीज 6 अगस्त को पड़ रही है। पांच अगस्त को रात 10:50 मिनट पर तृतीया तिथि शुरू होगी। जो सात अगस्त की रात 12:14 तक रहेगी। इस पूरे समय में यह त्योहार मनाया जाएगा।
कजरी तीज पर दिन में होती है पूजा और रात में चंद्रमा को दिया जाता है अर्घ
कजरी तीज पर पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम को चंद्रोदय के बाद व्रत खोला जाता है। कजरी तीज के दिन जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। चंद्रोदय के बाद भोजन करके व्रत तोड़ा जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी सहेलियों के साथ एक जगह एकत्र होती हैं और पूरे दिन कजली के गीत गाते हुए नृत्य करती हैं। कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। गाय की पूजा करने के बाद गाय को आटे की सात लोईयों पर गुड़ और घी रखकर खिलाया जाता है। उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
महत्व: पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए किया जाता है व्रत
यह तीज शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन को अच्छा रखने के लिए करती हैं। इसके साथ ही माना जाता है कि अगर किसी लड़की की शादी में देरी या किसी भी तरह की रुकावटें आ रही है तो इस व्रत को जरूर करना चाहिए। इससे उसकी शादी जल्दी हो जाती है। मान्यता यह भी है कि सुयोग्य वर यानी अच्छा पति मिलता है। कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज व सातूड़ी तीज भी कहा जाता है।
चांदी की अंगूठी और गेहूं के दानों के साथ दिया जाता है अर्घ
कजरी तीज पर संध्या को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ दिया जाता है। फिर उन्हें भी रोली, अक्षत और मौली अर्पित की जाती है। चांदी की अंगूठी और गेहूं के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा को अर्घ देते हुए अपने स्थान पर खड़े होकर परिक्रमा करना चाहिए।
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