Saturday, 20 June 2020

सूर्य ग्रहण के बाद 22 जून से शुरू होगी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र, सालभर में चार बार ऋतुओं के संधिकाल में आता है देवी पूजा का नौ दिवसीय पर



रविवार को आषाढ़ मास की अमावस्या है। इस दिन सूर्य ग्रहण भी होगा। इसके बाद सोमवार, 22 जून से 29 जून तक आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार सालभर में चार बार ऋतुओं के संधिकाल में नवरात्र आती है।

आषाढ़ और माघ मास की नवरात्र गुप्त मानी जाती है। चैत्र और आश्विन मास की नवरात्र सामान्य होती है। ऋतुओं के संधिकाल में मौसमी बीमारियों का असर बढ़ जाता है। इस समय में खान-पान से संबंधित सावधानी रखनी चाहिए। नवरात्र में व्रत-उपवास करने से खान-पान के संबंध में होने वाली लापरवाही से बचा जा सकता है। इन दिनों में ऐसे खाने से बचना चाहिए, जो आसानी से पचता नहीं है। अधिक से अधिक फलाहार करना चाहिए।

देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्र में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए। ये नौ स्वरूप हैं शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

गुप्त नवरात्र में होते ही दस महाविद्याओं की पूजा

गुप्त नवरात्र में विशेष रूप से दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। ये दस महाविद्याएं हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी।

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