शुक्रवार, 21 अगस्त को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी हरितालिका तीज है। ये व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए करती हैं। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से ये व्रत करती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हरितालिका व्रत पर गणेशजी, शिव-पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। जानिए इस व्रत से जुड़ी 9 खास बातें…
1. मान्यता है कि सबसे पहले देवी पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए हरितालिका का व्रत किया था। इस व्रत से शिवजी प्रसन्न हुए। इसके बाद शिव-पार्वती का विवाह हुआ।
2. हरितालिका व्रत करने वाली महिलाएं इस तिथि पर वह कथा सुनती है, जो देवी पार्वती के जीवन में घटित हुई थी। इस कथा में पार्वती के त्याग, संयम, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा बताई गई है। ये कथा सुनने से महिलाओं का मनोबल ऊंचा होता है।
3. दक्ष कन्या सती ने शिवजी के अपमान से दुखी होकर पिता के यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। इसके बाद देवी ने मैना और हिमवान की पुत्री के रूप में अवतार लिया। पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए निराहार रहकर कठोर तप किया था। तप से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। इसके बाद हिमावान और मैना ने शिव-पार्वती का विवाह करवाया।
4. जो महिलाएं ये व्रत करती हैं, वे इस दिन निराहार रहती हैं। कुछ महिलाएं ये व्रत निर्जल रहकर करती हैं। व्रत के दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद पूजा-पाठ की जाती है। पूजन के बाद ही महिलाएं अन्न और जल ग्रहण करती हैं।
5. इस व्रत में महिलाएं किसी शिव मंदिर में शिवलिंग के सामने बैठकर गणेशजी, शिवजी और माता पार्वती की पूजा करें। पूजा में देवी मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए।
मंत्र- गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला।
सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।
इस मंत्र का अर्थ यह है कि गौरी नित्य मुझ पर प्रसन्न रहें, मंगला मेरे पापों का नाश करें। ललिता मुझे सौभाग्य प्रदान करें और भवानी मुझे सब सिद्धियां प्रदान करें।
6. माता पार्वती के लिए सुहाग का सामान जैसे लाल चूड़ियां, लाल चुनरी, कुमकुम आदि चीजें मंदिर में अर्पित करनी चाहिए। किसी जरूरतमंद सुहागिन को ये चीजें दान भी करनी चाहिए।
7. इस दिन घर में भी भगवान शिव, माता पार्वती और गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। घर के मंदिर को फूलों से सजाएं। एक चौकी पर केले के पत्ते रखकर शिवजी, पार्वती और गणेशजी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें। देवी-देवताओं का आह्वान करें। विधिवत पूजन करें। सुहाग का सामान देवी मां को चढ़ाएं।
8. जो महिलाएं अस्वस्थ हैं या गर्भवती हैं, उन्हें इस व्रत के संबंध में सावधानी रखनी चाहिए। खान-पान का विशेष ध्यान रखें। भूखे रहने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाएं फलाहार कर सकती हैं। साथ ही, डॉक्टर के परामर्श का विशेष ध्यान रखें।
9. अभी कोरोना महामारी की वजह से घर से बाहर जाते समय विशेष सावधानी रखें। मंदिरों में भीड़ रहेगी, ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का ध्यान रखें।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar
https://ift.tt/327rlGG
No comments:
Post a Comment