बोरोबुदुर इंडोनेशिया के मध्य जावा प्रान्त के मगेलांग नगर में स्थित 9वीं सदी का महायान बौद्ध मंदिर है। यह 6 चोकोर चबूतरों पर बना है, जिसमें से तीन का ऊपरी भाग गोलाकार है। यह 2, 672 शिलालेखों और 504 बुद्ध प्रतिमाओं से सजा हुआ है। इसके बीच में बने प्रमुख गुंबद के चारों ओर स्तूप वाली 72 बुद्ध प्रतिमाएं हैं। इसे विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर माना जाता है। इस बौद्ध मंदिर का निर्माण 49 फीट ऊंची चट्टान पर किया गया था।
9 मंजिला है यह मंदिर
बोरोबुदुर को एक बड़े स्तूप की तरह बनाया गया है। इसका स्वरूप पिरामिड से प्रेरित है। इसका मूल आधार वर्गाकार है, जिसकी हर भुजा करीब 118 मीटर की है। इसमें नौ मंजिलें हैं। निचली 6 मंजिलें चोकोर और ऊपरी तीन गोलाकार हैं। ऊपरी मंजिल के बीच में एक बड़े स्तूप के चारों ओर घंटी के आकार के 72 छोटे स्तूप हैं। जिनमें नक्काशी किए गए छोटे-छोटे छेद बने हैं। बुद्ध की मूर्तियां इन छोटे-छोटे छेद से बने पॉट के अंदर स्थापित हैं।
9वीं सदी में हुआ था निर्माण
इसके स्तूप में जावा और उसके पड़ोस के द्वीपों पर शासन करने वाले भारत के राजाओं की वास्तुशिल्पीय परिकल्पना का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलता है। इसके सबसे ऊपरी हिस्से पर घंटे के आकार का विशाल स्तूप है, इसके शिलापट्टों पर बुद्ध की अनेक मूर्तियां बनी हुई हैं। इसका निर्माण 9वीं सदी में शैलेन्द्र राजवंश के कार्यकाल में हुआ। स्मारक में बहुत सारी सीढ़ियां व्यवस्थित रूप से बनी हुई हैं। गलियारों में 1460 शिलाओं पर बुद्ध से जुड़ी कथाओं का वर्णन किया गया है।
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