कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया, वो गीता का ज्ञान कहा गया। ये नीतियां भगवान ने गाईं, इसलिए इसे भगवत् गीता कहा गया है। इसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन का कर्म की शिक्षा दी और ये बताया कि जीवन-मृत्यु का चक्र क्या है। भगवान ने इसी गीता के उपदेश में भगवान में अपना विराट स्वरूप भी दिखाया और ये घोषणा भी की कि वे ही इस सृष्टि के कर्ता-धर्ता हैं।
भगवान में अर्जुन को जो ज्ञान दिया उसके सार में से कुछ ऐसा ज्ञान है जो हर इंसान को अपने निजी जीवन में कभी ना कभी काम आता ही है। उसमें से कुछ प्रमुख ये हैं…
- व्यक्ति अपने विश्वास से ही बनता है। वो जैसा मानता है, वैसा ही बनता है। इसलिए, कभी खुद की क्षमताओं पर शंका ना करो।
- जो हुआ अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वो अच्छा ही है। और, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।
- अपने कर्तव्यों को निष्ठा और श्रम से पूरा करो।
- आप खाली हाथ आए थे, और खाली हाथ ही जाएंगे। इसलिए, सबके प्रति विनम्र रहें।
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