घर-परिवार में छोटी-छोटी बातों से शुरू हुए झगड़े बढ़ जाए तो रिश्तों में दरार पड़ सकती है। इसीलिए परिवार में क्रोध नहीं करना चाहिए। क्योंकि, क्रोध में कहे गए शब्द बहुत घातक सिद्ध हो सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहे, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार एक पिता ने अपने बेटे को चार ऐसी बातें बताईं, जिनका ध्यान रखने पर घर में सुख-शांति बनी रहती है।
कथा के अनुसार पुराने समय में किसी गांव में एक विद्वान व्यक्ति था। गांव के लोग उसके पास अपनी समस्याएं लेकर आते और वो उनका सटीक समाधान बता देता। उसका एक पुत्र था। वह पिता की तरह बुद्धिमान नहीं था। इसीलिए विद्वान व्यक्ति को उसके भविष्य की चिंता लगी रहती थी।
जब वह व्यक्ति बूढ़ा हो गया तो एक दिन उसे लगा कि बुढ़ापे में बीमारियां लगी रहेंगी, पता नहीं कब मेरी मृत्यु हो जाए। ऐसा सोचकर उसने अपने पुत्र को बुलाया और कहा कि बेटा अब मैं बीमार रहने लगा हूं। मुझे तुम्हारे लिए बहुत फिक्र होती है। आज मैं तुम्हें चार ऐसी बातें बता रहा हूं, जिनका ध्यान रखने पर तुम्हें कभी भी कोई परेशानी नहीं होगी।
पहली बात ये है कि परिवार में सुख-शांति बनी रहे, इसके लिए कभी भी घर में क्रोध नहीं करना। क्रोध में कहे गए शब्द परिवार को लोगों को बहुत ज्यादा दुख पहुंचाते हैं। इन शब्दों की वजह से रिश्ते भी टूट सकते हैं। अगर कोई तुम्हें कुछ बुरा कह भी रहा है तब भी शांत रहो। शांत से ही विवाद खत्म किए जा सकते हैं। दूसरों को क्षमा करो और क्रोध का जवाब शांति से दो।
दूसरी बात ये है कि जरूरतमंद लोगों की मदद करो, लेकिन इस नेक काम को याद नहीं रखना। मदद के बदले में कुछ पाने की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। अगर ये उम्मीद पूरी नहीं होती है तो दुख होता है और नेक कर्म का पुण्य खत्म हो जाता है।
तीसरी बात ये है कि किसी भी काम में सफलता के लिए कड़ी मेहनत करना। खुद पर और भगवान पर पूरा भरोसा रखना। मेहनत करने वाले लोगों को भगवान की विशेष कृपा रहती है। देर से ही सही, लेकिन सफलता जरूर मिलती है।
चौथी बात ये है कि भी भी किसी चीज से अत्यधिक मोह नहीं रखना चाहिए। दूसरों की चीजें हड़पने की मत सोचना। लालच मत करना। गलत कामों से बचना। जो व्यक्ति इन बातों को याद रखता है, वह हमेशा सुखी रहता है।
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