उत्साह और सकारात्मक सोच से बड़ी-बड़ी परेशानियों को भी दूर किया जा सकता है। उत्साह के बिना निराशा बढ़ने लगती है और किसी काम में मन नहीं लग पाता है। इस कारण समस्याएं और अधिक बढ़ने लगती हैं। उत्साह के संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। इस कथा में उत्साह का महत्व बताया गया है।
कथा के अनुसार पुराने समय में एक राजा को अपने एक हाथी से विशेष स्नेह था। हर युद्ध में राजा उसी हाथी पर सवार होकर जाता था। हाथी की वजह से राजा ने कई युद्ध भी जीते थे। जब हाथी बूढ़ा हो गया तो राजा ने उसे युद्ध में ले जाना बंद कर दिया और उसकी देखरेख की विशेष व्यवस्था कर दी। सेवक सुबह-शाम हाथी के खाने-पीने का ध्यान रखते थे। लेकिन, वह हाथी उदास रहने लगा था।
एक दिन हाथी पानी पीने के लिए तालाब में गया तो वहीं दलदल में फंस गया। बहुत कोशिशों के बाद हाथी वहां से निकल नहीं पा रहा था। सेवकों ने हाथी को बाहर निकालने की बहुत कोशिश, लेकिन सफलता नहीं मिली। ये बात राजा को मालूम हुई तो वह अपने मंत्री के साथ तालाब किनारे पहुंच गए।
राजा का मंत्री बहुत विद्वान था। उसने राजा से तालाब के पास युद्ध के ढोल बजवाने की अनुमति मांगी। राजा को इसका कारण समझ नहीं आया, लेकिन मंत्री पर भरोसा करके उन्होंने ढोल बजाने की अनुमति दे दी। इसके बाद कुछ ही देर में तालाब के युद्ध के ढोल बजने लगे, युद्ध जैसा वातावरण निर्मित हो गया। कुछ ही देर में हाथी एकदम उठ गया और तुरंत ही तालाब से बाहर आकर राजा के पास खड़ा हो गया।
राजा को बहुत आश्चर्य हुआ कि कुछ देर पहले तक ये तालाब में फंसा हुआ था और बाहर निकलने की कोशिश भी नहीं कर रहा था, लेकिन ढोल की आवाज सुनकर बाहर आ गया। उन्होंने मंत्री से इसकी वजह से पूछी।
मंत्री ने राजा से कहा कि राजन् ये हाथी आपके साथ युद्ध में जाता था। इस वजह से उसके जीवन में उत्साह था, लेकिन जब आपने इसे युद्ध में ले जाना बंद कर दिया तो इसका उत्साह खत्म हो गया। ये निराश रहने लगा था। लेकिन, अभी जब हमने यहां युद्ध जैसा वातावरण बनाया तो इसे लगा कि अब फिर से युद्ध में जाना है, इसका उत्साह लौट आया और ये तालाब से बाहर निकलने में सफल हो गया।
प्रसंग की सीख
इस कथा की सीख यह है कि जीवन में उत्साह बहुत जरूरी है। उत्साह के बिना नकारात्मकता बढ़ने लगती है। इसीलिए हमेशा सकारात्मक सोचें और उत्साह बनाए रखें, तभी सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं और सफलता मिल सकती है।
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