पूजा-पाठ करने से मन शांत होता है, भगवान की कृपा मिलती है और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी वजह से लोग पूजा करते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोगों की पूजा सफल हो पाती है। भगवान की कृपा किन लोगों को मिलती है, इस संबंध में एक कथा प्रचलित है।
प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में एक संत किसी पेड़ के नीचे बैठकर मंत्र जाप कर रहे थे। तभी वहां एक ग्वाला पहुंचा। उसने देखा कि संत आंख बंद करके कुछ कर रहे हैं। उसे मंत्र जाप और पूजा-पाठ के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं थी।
मंत्र जाप करने के बाद संत ने आंखें खोली तो ग्वाले पूछा कि गुरुजी आप ये क्या कर रहे थे? संत ने उत्तर दिया कि मैं भगवान से बातें कर रहा था। ग्वाले फिर पूछा कि क्या ऐसा करने से भगवान सच में बात करते हैं?
संत समझ गए कि ग्वाला नादान है। उन्होंने कहा कि पहले हमें मंत्र जाप करना पड़ता है, फिर भगवान की कृपा में मिलती है। ग्वाले ने कहा कि कृपा करें मुझे वह मंत्र बताइए, मैं भी भगवान से बात करना चाहता हूं।
संत ने ग्वाले को ऊँ नम: शिवाय मंत्र बता दिया और वहां से चले गए। ग्वाला संत के बताए मंत्र का जाप करने लगा। मंत्र जाप करते समय उसके किसी बात का ध्यान नहीं रहा। वह पूरी एकाग्रता से मंत्र जाप करने लगा। उसके भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी वहां प्रकट हो गए।

शिवजी ने ग्वाले से आंखें खोलने के लिए कहा। ग्वाले ने जैसे ही आंखें खोली तो सामने शिवजी खड़े थे। लेकिन, ग्वाला तो नादान था, वह शिवजी को पहचानता नहीं था। उसने शिवजी को एक पेड़ से बांध दिया और उस संत को खोजने निकल गया।
संत उसी गांव में रहते थे। थोड़ी देर में ग्वाला संत के पास पहुंचा और पूरी बात बता दी। संत हैरान हो गए। वे तुरंत ही दौड़कर उस पेड़ के पास पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं था। उन्होंने ग्वाले से कहा कि यहां तो कोई नहीं है। ग्वाले ने कहा कि गुरुजी ध्यान से देखें, मैंने भगवान को यहीं पेड़ से बांधा है। लेकिन, संत को भगवान शिव नहीं दिख रहे थे। तब ग्वाले ने शिवजी से इसका कारण पूछा।
भोलेनाथ ने कहा कि मेरे दर्शन सिर्फ उन्हीं को हो सकते हैं, जिनकी भक्ति सच्ची है, जो निस्वार्थ भाव से भक्ति करता। संत को भगवान नहीं दिख रहे थे, लेकिन ये बात सुनाई दी। उसे अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने भगवान से क्षमा याचना की।
ग्वाले ने भगवान से संत को क्षमा करने की बात कही। भगवान शिव ने भी प्रिय भक्त की बात मान ली और संत को भी दर्शन दे दिए।
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