Thursday, 13 August 2020

हम स्वस्थ रहेंगे तब ही जीवन में सभी सुखों का लाभ उठा सकते हैं, इसीलिए जब तक शरीर स्वस्थ है, हमें पुण्य कर्म करना चाहिए, मृत्यु के बाद कोई कुछ नहीं कर सकता



पहला सुख निरोगी काया, यानी स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख है। शरीर स्वस्थ रहेगा तो हम सभी सुखों का लाभ उठा सकते हैं। इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के चौथे अध्याय की चौथी नीति में स्वस्थ शरीर का महत्व बताया है। चाणक्य कहते हैं कि-

यावत्स्वस्थो ह्ययं देहो यावन्मृत्युश्च दूरतः।

तावदात्महितं कुर्यात् प्राणान्ते किं करिष्यति।।

इस नीति में चाणक्य कहते हैं जब तक हम स्वस्थ हैं, हमारा शरीर हमारे नियंत्रण में है, तब तक आत्म कल्याण के लिए पुण्य कर्म कर लेना चाहिए। क्योंकि, मृत्यु होने के बाद कोई भी कुछ नहीं कर सकता है।

जीवन प्रबंधन

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व बताते हुए आचार्य कहते हैं कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ सिर्फ तब ही मिल सकते हैं, जब हमारा शरीर स्वस्थ हो। इसीलिए हम स्वस्थ बने रहे, इसके लिए जरूरी काम करते रहना चाहिए। अच्छा खान-पान, योग-प्राणायाम, संतुलित दिनचर्या का पालन करने से हम रोगों से बच सकते हैं।

स्वस्थ शरीर से धर्म-कर्म जैसे पूजा, दान-पुण्य कर सकते हैं। इसीलिए जब तक शरीर स्वस्थ है, हमें पुण्य कर्म कर लेना चाहिए। हमारे अच्छे काम ही हमारा जीवन सफल कर सकते हैं। मृत्यु के बाद कोई भी कुछ नहीं कर सकता है।

कौन थे आचार्य चाणक्य

पुराने समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था, तब चाणक्य ने पूरे देश को फिर से एक सूत्र में बांधा था। उस समय विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था। तब आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी कूट नीतियों से एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का एक छत्र सम्राट बनाया।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


chanakya niti about good work, health is wealth, life management tips in hindi according to chanakya

from Dainik Bhaskar
https://ift.tt/3fZUkAV

No comments:

Post a Comment

कैसे तोड़ें ? - मन और जगत के बंधन को || How to break the bond between mind and world?

श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम  सच्चिदानंद भगवान की जय। सनातन धर्म की जय।  अभी-अभी आप बहुत सुंदर कथा सुन रहे थे। मेरे क...