गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था। इस तिथि को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गणेश स्थापना से ही गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। जो कि 10 दिनों तक चलता है और अनन्त चतुर्दशी के दिन पूरा होता है। जो कि इस बार 1 सितंबर को है। काशी के ज्योतिषाचार्य और धर्मशास्त्रों के जानकार पं. गणेश मिश्र का कहना है कि गणेशजी के प्रसन्न होने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है। गणेश चतुर्थी से नए बिजनेस की शुरुआत, ज्वैलरी, प्रॉपर्टी और व्हीकल की खरीदारी शुभ होती है।
शुभ संयोग: चतुर्थी पर 4 ग्रहों के साथ हस्त नक्षत्र
पं. मिश्र के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी पर ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति से साध्य और रवियोग बन रहे हैं। इनके साथ ही हस्त नक्षत्र और कन्या राशि में चंद्रमा रहेगा। खास बात ये है कि सूर्य, मंगल, गुरु और शनि ये 4 ग्रह अपनी ही राशियों में रहेंगे। इससे ये दिन और खास हो गया है। ग्रह-नक्षत्रों के इस शुभ संयोग में गणेश स्थापना होने से समृद्धि और सुख-शांति मिलेगी। वहीं कई लोगों की मनोकामना भी पूरी होगी। पद्म पुराण के अनुसार गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए इसी समय गणेश स्थापना और पूजा करनी चाहिए।
कैसी हो गणेशजी की मूर्ति
पं. मिश्र बताते हैं कि घर, ऑफिस या अन्य सार्वजनिक जगह पर गणेश स्थापना के लिए मिट्टी की मूर्ति बनाई जानी चाहिए। घर या ऑफिस में स्थाई रूप से गणेश स्थापना करना चाह रहे हैं तो सोने, चांदी, स्फटिक या अन्य पवित्र धातु या रत्न से बनी गणेश मूर्ति ला सकते हैं। गणेश प्रतिमा कहीं से खंडित नहीं होनी चाहिए। इसमें गणेश जी के हाथों में अंकुश, पाश, लड्डू हो और हाथ वरमुद्रा में यानी आशीर्वाद देते हुए हो। कंधे पर नाग रूप में जनेऊ और वाहन के रूप में मूषक होना चाहिए।

पूजा शुरू करने से पहले ये मंत्र बोलें
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

पूजा के बाद ये मंत्र बोलकर गणेशजी को नमस्कार करें
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय |
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ||
गणेश जी की आरती

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